
CTET 2025 का नया नोटिफिकेशन – क्या बदला है?
केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (Central Teacher Eligibility Test) का आयोजन CBSE करता है। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक सरकारी स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य पात्रता मानक है। CTET पास करने वाले उम्मीदवार विभिन्न राज्यों की TET या केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय (NVS) जैसी संस्थाओं में भी आवेदन कर सकते हैं।
- 1. पुराने क्वालिफाइंग मार्क्स सिस्टम में बदलाव:पहले CTET पास करने के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को 60% यानी 150 में से 90 अंक लाना अनिवार्य था। अब नए नियमों के तहत कट-ऑफ स्कोर फ्लेक्सिबल कर दिया गया है। राज्य सरकारें और भर्ती करने वाली संस्थाएं अपनी जरूरतों के अनुसार न्यूनतम अंक तय कर सकेंगी।
- 2. अंकों के आधार पर ग्रेडिंग सिस्टम:अब केवल “पास या फेल” की बजाय ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया है। इसमें उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन के आधार पर A, B, C या D ग्रेड दिया जाएगा। उच्च ग्रेड वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी।
- 3. नए प्रश्न पैटर्न:पेपर 1 और पेपर 2 के प्रश्नों में केस स्टडी, एप्लीकेशन-बेस्ड प्रश्न और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शिक्षण प्रश्न शामिल किए जाएंगे। यह बदलाव अभ्यर्थियों की प्रैक्टिकल समझ और शिक्षण कौशल का बेहतर मूल्यांकन करेगा।
- 4. डिजिटल सर्टिफिकेट अनिवार्य:अब CTET पास करने वालों को केवल डिजिटल मार्कशीट और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यह सर्टिफिकेट डिजीलॉकर पर उपलब्ध रहेगा।
- 5. सर्टिफिकेट की वैधता:पहले CTET प्रमाणपत्र की वैधता 7 साल थी, जिसे बाद में लाइफटाइम वैधता कर दिया गया। यह नियम 2025 में भी जारी रहेगा।
CTET 2025 परीक्षा पैटर्न
CTET 2025 परीक्षा में भी दो पेपर होंगे –
- 1. पेपर I: कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक बनने वालों के लिए।
- 2. पेपर II: कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक बनने वालों के लिए।
- हर पेपर में 150 प्रश्न और 150 अंक।
- भाषा 1 और भाषा 2, गणित, पर्यावरण अध्ययन (पेपर 1), तथा सामाजिक विज्ञान/विज्ञान (पेपर 2) शामिल होंगे।
कौन कर सकता है आवेदन?
- प्राथमिक शिक्षक (कक्षा 1-5) के लिए उम्मीदवार को 12वीं पास और D.El.Ed या B.El.Ed होना चाहिए।
- उच्च प्राथमिक शिक्षक (कक्षा 6-8) के लिए ग्रेजुएशन के साथ B.Ed अनिवार्य है।
नए नोटिफिकेशन में योग्यता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
CTET 2025 में क्या लाभ होगा?
ग्रेडिंग सिस्टम के कारण उम्मीदवार को अपनी रैंकिंग स्पष्ट दिखाई देगी।राज्य सरकारें अपनी आवश्यकता के अनुसार कट-ऑफ तय कर सकेंगी, जिससे योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिलेगा।डिजिटल सर्टिफिकेट से समय और कागज दोनों की बचत होगी।नए प्रश्न पैटर्न से अच्छे शिक्षण कौशल वाले उम्मीदवारों को बढ़त मिलेगी।