
भविष्य में लोकतंत्र की रक्षा: बिहार में SIR प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
SIR की आवश्यकता
भारत में चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता तभी होती है जब मतदाता सूची अद्यतन और त्रुटि-मुक्त होती है। यही कारण है कि 24 जून 2025 को चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) की घोषणा की। यह एक विशिष्ट, गहन वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया है, जिसका लक्ष्य फर्जी प्रविष्टियों को हटाना है, जबकि प्रवासन, शहरीकरण और आबादी में बदलाव को ध्यान में रखते हुए।
इसके बावजूद, इस अभ्यास का स्वरूप विवादास्पद रहा। SIR के तहत मान्य केवल ग्यारह विशिष्ट दस्तावेज थे— आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड आदि आम तौर पर नहीं स्वीकार किए जाते हैं। लाखों लोगों, खासकर प्रवासी, गरीब और कमजोर वर्ग के मतदाता, इससे वंचित हो सकते थे।
2. सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप & आदेश
इन चिंताओं के कारण सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल किया गया था। 14 अगस्त 2025 को, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव आयोग को सीमित निर्देश दिए SIR प्रक्रिया पर।
महत्वपूर्ण निर्देशों में शामिल थे: 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम, जो जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट में थे लेकिन 1 अगस्त 2025 की ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं थे, के नाम, EPIC नंबर, और हटाने का कारण
(जैसे मर गया, स्थायी रूप से स्थानांतरित, नहीं आया, फिर से आया) प्रकाशित करना होगा। प्रदर्शन के लिए यह स्थानीय स्तर पर (BLO कार्यालय, पंचायत, बूथ आदि) और ऑनलाइन (CEO और DEO वेबसाइटों पर) उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
ताकि सूची से हटाए गए व्यक्ति आधार पर आपत्ति दर्ज कर सकें, EPIC और आधार को पहचान/स्थायी पता प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का आदेश दिया गया। 19 अगस्त 2025 को विवरण जारी किया जाना चाहिए था और 22 अगस्त 2025 तक ECI को एक आचरण रिपोर्ट (compliance report) देना चाहिए था।
3. चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, 17 अगस्त से 18 अगस्त 2025 को चुनाव आयोग और बिहार CEO कार्यालय ने निम्नलिखित कार्रवाई की: 56 घंटे के भीतर वेबसाइट पर 65 लाख मतदाताओं की सूची प्रकाशित की गई। CEO बिहार और सभी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) की वेबसाइटों पर यह सूची उपलब्ध है;
आप EPIC नंबर से खोज सकते हैं और बूथ-वार डाउनलोड कर सकते हैं। सूची में शामिल हैं: नाम, पिता का नाम, EPIC नंबर, बूथ-पर भाग और लाइन नंबर, आयु, लिंग और गैर-उपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु या दोहरी प्रविष्टि का कारण
राज्य भर में लगभग 90,712 बूथों पर यह सूची चिपकाई गई, जिसमें सरकारी कार्यालयों और मतदान केंद्रों में प्रदर्शन शामिल था ।
जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें मौजूदा EPIC नंबरों के आधार पर शिकायत करने और जानकारी लेने की अनुमति दी गई।
4. राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और जनांदोलन
विपक्षी पार्टियों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया, जबकि भाजपा-नेता या आयोग ने इसे प्रावधानों और प्रक्रिया की पारदर्शिता की दिशा में आवश्यक बताया: टेलंगाना TPCC प्रमुख महेश कुमार गौड़ ने आधार-EPIC लिंकिंग की प्रमुखता को लोकतंत्र की “विजय” बताया।
विरोधी पक्ष ने आदेश को “आशा की किरण” बताया और इसे लोकतंत्र की रक्षा का प्रतीक बताया। India Block ने कहा कि SIR एक वोटर वंचना (vote theft) की कोशिश कर रहा है, जिसके प्रति चुनाव आयोग ने बिना सबूत की आपत्तियों के अगली कार्रवाई की धमकी दी।
राहुल गांधी ने “वोट यात्रा” (Vote Adhikar Yatra) शुरू की, जो 1,300 किलोमीटर की यात्रा करते हुए लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करती है।
5. निष्कर्ष और समग्र प्रभाव
5.1 लोकतंत्र और अधिकारों का बचाव यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि कोई नागरिक गलती या त्रुटि के कारण मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का सहयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत है।
5.2 तकनीकी और व्यवस्थापकीय पारदर्शिता EPIC-आधारित आपत्ति प्रणाली और शीघ्र प्रकाशन (ऑनलाइन और ऑफलाइन(?)) ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। बूथ-वार सूची चिपकाए जाने से जमीन पर जानकारी को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया।
5.3 राजनीतिक आयाम विपक्षी दलों ने इस कदम को लोकतंत्र की जीत बताया, वहीं संविधान और वोटर अधिकारों पर एक नया बहस छिड़ा। SIR की रूपरेखा और नियोजन राजनीतिक दृष्टिकोण से असंतोष और आरोपों का केंद्र बन गए।
5.4 आगे का रास्ता राज्यों में SIR जैसे अभ्यास अगर की जाएं, तो उन्हें नागरकों की अनुभूति, प्रवासन तथ्य, दस्तावेज़ की सुलभता आदि को ध्यान में रखते हुए योजना बनाना होगा। EFFORTS जैसे आधार-EPIC लिंकिंग और विस्तृत दस्तावेज़ी प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, लेकिन इनका समावेशी और संवेदनशील होना आवश्यक है।
इस प्रकार, बिहार में हुए SIR और सुप्रीम कोर्ट के बीच का गतिरोध, पारदर्शिता, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, तकनीकी प्रणाली, और राजनीतिक संघर्ष के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। यह पूरे देश में वोटर सूची प्रबंधन, न्यायालय और आयोग के कार्यशैली, और लोकतंत्र की जड़ता को मजबूती से परिभाषित करेगा।
Sunny Mahto (Founder of GovYojna.de) एक युवा ब्लॉगर, डिजिटल क्रिएटर और सोशल मीडिया प्रचारक हैं। वे शिक्षा, सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana), सरकारी नौकरियों की जानकारी और राजनीति से जुड़े नवीनतम अपडेट्स पर रिसर्च आधारित लेख लिखते हैं। उनका लक्ष्य है कि सरकारी योजनाओं और रोजगार से जुड़ी सटीक जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचे, ताकि लोग सही समय पर लाभ उठा सकें।
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