
1.राज्य-स्तरीय कल्याण की पहल
राज्य सरकारें भी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से पीछे नहीं रहतीं, खासकर जब बात सीधे अपने नागरिकों की है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में प्रवासी कर्मचारियों के पुनर्वास और स्वावलंबन के लिए “श्रमश्री” योजना की घोषणा की है।
2. श्रमश्री योजना – क्या है यह?
घोषणा और अनुमोदन: 18 अगस्त 2025 को, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद “श्रमश्री” योजना की घोषणा की। प्रवासी कर्मचारी जो बंगाल के निवासी हैं लेकिन दूसरे राज्यों (विशेषकर बीजेपी शासित राज्यों) में काम कर रहे हैं और अब वापस लौटने के इच्छुक हैं,
लाभार्थी योजना का लाभ उठाएंगे। इस श्रेणी में लगभग 22 लाख प्रवासी कर्मचारी शामिल हैं।
3. सहायता राशि और अवधि
प्रत्येक कर्मचारी को वापस लौटने पर ₹5,000 की एकमुश्त यात्रा सहायता मिलेगी। मासिक वित्तीय सहायता: इसके अलावा, श्रमिकों को एक वर्ष या जब तक काम नहीं मिल जाता, ₹5,000 तक की मासिक सहायता दी जाएगी।
4. अतिरिक्त कल्याण सहायता
श्रमश्री योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है; इसके तहत कई अतिरिक्त सामाजिक और कल्याणकारी लाभ भी मिलते हैं: भोजन सुरक्षा: Khadya Sathi योजना से मुफ्त राशन मिलेगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा: कर्मचारियों को स्वास्थ्य साथी (Swasthya Sathi) की देखरेख में स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे। नौकरी सहायता: Karamshree योजना के तहत जॉब कार्ड और Utkarsha Bangla के माध्यम से कौशल मूल्यांकन और प्रशिक्षण होगा।
आश्रय और खाना: अगर आवास नहीं है, तो सामुदायिक किचन या आश्रय केंद्रों में ठहरने की व्यवस्था होगी। बच्चों को शिक्षित करना: सरकारी स्कूलों में काम करने वाले बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।
मदद का नेटवर्क: “Amader Para Amader Samadhan” शिविरों और प्रवासी कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड से मदद और मार्गदर्शन मिलेगा।
5. योजना के उद्देश्य और संदर्भ
भाषिक उत्पीड़न का सामना कर रहे कर्मचारी: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बंगाली भाषी कर्मचारियों को कई बीजेपी शासित राज्यों में पूर्वनियोजित उत्पीड़न, पुलिस कार्रवाई और मंचीय हिंसा का सामना करना पड़ा है।
पुनर्वास और खुशी: योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ कर्मचारियों को वापस लाना नहीं है, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिरता बनाना है— उनका पुनर्वास, रोजगार की सुरक्षा और सुख-सुविधा सुनिश्चित करना
6. प्रभाव और प्रारंभिक परिणाम
पूर्ववर्ती संख्या: पिछले कुछ हफ्तों में लगभग 2,730 परिवार, या 10,000 लोग, बंगाल वापस आ गए हैं। देश के राजनीतिक परिदृश्य में यह योजना:
विधानसभा चुनाव 2026 के समय यह कदम सामाजिक न्याय, बंगाली पहचान और राज्य की भावना को दर्शाता है।
7. संभावित चुनौतियाँ और आलोचनात्मक दृष्टिकोण
इन क्लेम्स की वास्तविकता: राजनीतिक लाभ के लिए कुछ आलोचकों ने केंद्रीय सरकार का दावा किया कि भारत में श्रमिक हाशिए पर आ गए हैं। विपक्षी नेता ने कहा, “₹5,000… श्रमिक कमाता है ₹50,000 से ₹1.5 लाख। यह धन का क्या उद्देश्य होगा?
कार्यान्वयन प्रक्रिया में पारदर्शिता: 22 लाख कर्मचारियों तक पहुँचने के लिए पारदर्शिता और कार्यकुशलता की आवश्यकता होगी। निकालने की अवधि: शत-प्रतिशत स्थिति केवल तब उपयोगी होगी जब सहायता समय पर मिलती है, यानी कर्मचारियों के लौटते ही और उनके नौकरी मिलने से पहले।
लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा: ₹5,000 मासिक सहायता एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हो सकता यदि रोजगार मिलने में अधिक समय लगे।
8. निष्कर्ष
भाषा-आधारित उत्पीड़न से प्रभावित प्रवासी नागरिकों को वापस लाने और पुनर्स्थापित करने के लिए श्रमश्री योजना एक महत्वपूर्ण, मानव-केंद्रित अभियान है।
यह योजना केवल पैसे नहीं देती, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य और आश्रय के आधारों को फिर से बनाती है। लेकिन इसके कार्यान्वयन और दीर्घकालिक प्रभाव को देखते हुए सतर्कता और निगरानी की जरूरत होगी।
(Author Bio)
Sunny Mahto, एक युवा ब्लॉगर और @govyojna.de वेबसाइट के संस्थापक, ने इस लेख को लिखा है। Sunny का लक्ष्य है कि सबसे पहले और सबसे सरल भाषा (हिंदी) में लोगों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, भर्ती और राजनीति से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी देना। नियमित रूप से अपडेट आपके इंस्टाग्राम हैंडल @govyojna.de और फेसबुक पेज “व्यापार है सुंदर” पर भी पोस्ट किए जाते हैं।
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