
भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत में मिग-21 (MiG-21) का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रहा है। सोवियत संघ द्वारा विकसित यह सुपरसोनिक जेट लड़ाकू विमान 1960 के दशक में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। इसे “फिशबेड” (Fishbed) नाम से भी जाना जाता है। अपनी गति, मजबूती और युद्धक क्षमता के कारण यह विमान लंबे समय तक भारत की मुख्य सुरक्षा ढाल बना रहा। हालांकि, इसके पुराने डिज़ाइन और बार-बार होने वाले हादसों के कारण मिग-21 को “फ्लाइंग कॉफिन” (Flying Coffin) की उपाधि भी मिली, लेकिन इसके बावजूद भारतीय वायुसेना में इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई।
मिग-21 का रिटायरमेंट
भारतीय वायुसेना ने मिग-21 के पुराने वर्जन को चरणबद्ध तरीके से रिटायर करना शुरू कर दिया है। 2025 तक सभी मिग-21 विमान वायुसेना से पूरी तरह हटा दिए जाएंगे। इसकी जगह आधुनिक विमान जैसे तेजस (LCA), राफेल और सुखोई-30 MKI को तैनात किया जा रहा है।
- 62 साल बाद होगी भारतीय वायु सेना फाइटर जेट रिटायर होने जा रही हैं
- 1963 में सामिल हुआ था पहली बार मिग 21 भारत का पहला सुपरसैनीक जेट था जिसने 62 साल तक भारत की देश की वायु सेनाओं की शान थी
मिग-21 का इतिहास
मिग-21 का विकास सोवियत संघ ने 1950 के दशक में किया था। यह दुनिया का पहला बड़े पैमाने पर बनाया गया सुपरसोनिक जेट लड़ाकू विमान था। भारत ने 1963 में मिग-21 को अपनी वायुसेना में शामिल किया। भारत और सोवियत संघ के बीच हुई रक्षा डील के तहत भारत ने इस विमान की लाइसेंस प्रोडक्शन की अनुमति भी ली, जिसके बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसे भारत में बनाया।
भारत की बड़ी जीत में मिग-21 का योगदान
1. 1971 का भारत-पाक युद्ध: मिग-21 ने इस युद्ध में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमानों को मार गिराया। इसकी तेज़ गति और आक्रामक रणनीति ने भारत को हवाई युद्ध में बढ़त दिलाई।
2. कारगिल युद्ध 1999: कारगिल युद्ध के दौरान भी मिग-21 ने पाकिस्तान के ठिकानों पर बमबारी कर भारतीय सेना की मदद की।
3. बालाकोट एयरस्ट्राइक 2019: विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के एफ-16 विमान को गिराकर इस विमान की युद्धक क्षमता को साबित किया।
तकनीकी विशेषताएँ
मिग-21 को अपने समय का अत्याधुनिक विमान माना जाता था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- गति: मिग-21 की अधिकतम गति लगभग 2,230 किलोमीटर प्रति घंटा (Mach 2.05) है।
- ऊंचाई: यह 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
- हथियार: इसमें 23mm की तोप, एयर-टू-एयर मिसाइल, रॉकेट और बम फिट किए जा सकते हैं।
- रेंज: इसकी उड़ान रेंज लगभग 1,200 किलोमीटर है
- डिज़ाइन: इसका डेल्टा विंग डिजाइन इसे तेज़ मोड़ लेने की क्षमता देता है, जो हवाई युद्ध में बेहद काम आता है।

‘ फ्लाइंग कॉफिन’ की छवि
बीते वर्षों में मिग-21 के कई हादसे हुए। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशकों में 400 से अधिक मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें सैकड़ों पायलटों ने अपनी जान गंवाई है। इसके पीछे तकनीकी खामियाँ, पुराना डिज़ाइन और उन्नत मेंटेनेंस की कमी को जिम्मेदार माना जाता है। इसी कारण इसे “फ्लाइंग कॉफिन” कहा जाने लगा।
मिग-21 की विरासत (राज)
मिग-21 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के साहस और गौरव का प्रतीक है। इसने भारत की कई जीतों में अहम भूमिका निभाई है। आज भी जब इसकी बात होती है, तो भारतीय पायलटों की बहादुरी और समर्पण की कहानियाँ याद आ जाती हैं। यह विमान भले ही रिटायर हो रहा है, लेकिन इसके द्वारा रचे गए इतिहास को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मिग-21 ने भारतीय वायुसेना को सुपरसोनिक युग में प्रवेश दिलाया। यह विमान भारत की वायु शक्ति का प्रतीक रहा। समय के साथ तकनीक बदलती है और नए विमान आते हैं, लेकिन मिग-21 की बहादुरी, सफलता और गौरव का अध्याय हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।