
हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार बहुत महत्वपूर्ण हैं। हर पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि खुशी, श्रद्धा और विश्वास का संदेश भी देता है। महालक्ष्मी व्रत इन्हीं व्रतों में से एक है। यह व्रत देवी लक्ष्मी को समर्पित है और इसका पालन करने से घर-परिवार को धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य मिलता है।
महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल अष्टमी से आश्विन मास की कृष्ण अष्टमी तक 16 दिनों तक चलता रहता है। यह व्रत देवी महालक्ष्मी की पूजा करता है, जिसे हाथी अष्टमी या हाथी पूजन भी कहते हैं।
इस साल (2025) महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 31 अगस्त से हो चुकी है और इसका समापन यानी उद्यापन 14 सितंबर 2025 को किया जाएगा।
महालक्ष्मी व्रत का महत्व
सनातन धर्म के अनुसार, देवी लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और सुख की देवता हैं। मां लक्ष्मी का व्रत करने वाले लोग गरीबी, अभाव और संकट से छुटकारा पाते हैं। इस व्रत को करने से घर में कभी भोजन की कमी नहीं होती। परिवार में प्रेम और सुख बरकरार रहता है। माना जाता है कि पितृपक्ष में महालक्ष्मी व्रत करने से पितरों को भी खुशी मिलती है क्योंकि यह अक्सर पितृपक्ष में होता है। यह व्रत आर्थिक समस्याओं से परेशान लोगों के लिए खास है।
महालक्ष्मी व्रत कथा
- कथाओं के अनुसार एक समय की बात है, एक गाँव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह बेहद दरिद्र था, लेकिन उसका मन हमेशा भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता। वह हर दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता।
- उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और वर मांगने को कहा। ब्राह्मण ने निवेदन किया – “हे प्रभु! मैं चाहता हूँ कि लक्ष्मी जी मेरे घर में निवास करें।”
- तब विष्णु जी ने कहा – “मंदिर के सामने जो स्त्री उपले थापने आती है, वही लक्ष्मी जी हैं। तुम उनसे अपने घर आने का निवेदन करो।”
- ब्राह्मण ने वैसा ही किया। कुछ देर बाद लक्ष्मी जी उपले थापने आईं। ब्राह्मण ने उन्हें प्रणाम करके अपने घर आने का आग्रह किया। तब लक्ष्मी जी ने कहा – “यदि तुम पूरे 16 दिन विधि-विधान से महालक्ष्मी व्रत करोगे और 16वें दिन चंद्रमा को अर्घ्य दोगे, तो तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।”
- ब्राह्मण ने श्रद्धा और नियमपूर्वक पूरे 16 दिन यह व्रत किया। 16वें दिन चंद्रमा को अर्घ्य देकर मां लक्ष्मी की प्रार्थना की। प्रसन्न होकर लक्ष्मी जी ने उसकी दरिद्रता दूर कर दी और उसका घर धन-धान्य से भर गया।इस प्रकार महालक्ष्मी व्रत की महिमा पूरे जगत में विख्यात हुई।

महालक्ष्मी व्रत उद्यापन का महत्व
16 दिनों तक व्रत रखने के बाद इसका उद्यापन अष्टमी तिथि को होता है। उद्यापन का अर्थ है व्रत को विधिपूर्वक पूरा करना। उद्यापन के दिन विशेष पूजा, हवन और ब्राह्मण भोजन होता है। देवी महालक्ष्मी की कहानी सुनाई जाती है और उनकी आरती की जाती है।
चंद्रमा को अर्घ्य देना व्रत का अंत है। व्रत करने वाले को दान-पुण्य भी करना चाहिए, जैसे वस्त्र, फल, अन्न और दक्षिणा।
महालक्ष्मी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
1. स्नान और विचार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद आप पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएंगे। हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत करने का निश्चय करें।
2. पूजास्थल की व्यवस्था घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) पूजा के लिए बनाएं। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर महालक्ष्मी की मूर्ति या प्रतिमा रखें। गंगाजल से प्रतिमा को धोएं।
3. देवता का श्रृंगार और त्याग मां को रोली, चंदन, केसर, हल्दी, सिंदूर और अन्य सामग्री से तिलक करें। लौंग, इलायची, सुपारी, फल, फूल, नारियल और मिठाई को अर्पित करें। लाल कपड़े, आभूषण और श्रृंगार की वस्तुएं लक्ष्मी जी को चढ़ाना शुभ माना जाता है।
4. हाथी आरती इस व्रत में हाथी का विशेष पूजन किया जाता है। देवी लक्ष्मी को हाथी बहुत अच्छे लगते हैं, इसलिए उनकी मूर्ति के साथ एक छोटे से हाथी की मूर्ति या चित्र भी पूजा करें।
5. आरती करना और कहानी पढ़ना मां लक्ष्मी को दीपक जलाकर आरती करें। महालक्ष्मी व्रतकथा पढ़ें। घर के सभी लोग एकत्र होकर कथा सुनें।
6. चाँद को अर्घ्य 16वें दिन चंद्रमा उदय होने पर जल से अर्घ्य दें और लक्ष्मी से धन की प्रार्थना करें।
7: उत्पादन हवन करके ब्राह्मणों को भोजन दें। दक्षिणा करें और दान करें। दान दें।
महालक्ष्मी व्रत में क्या करें और क्या न करें
- क्या करें
पूरे व्रत काल में सात्विक भोजन करें।मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।दीपक अवश्य जलाएं और घर में स्वच्छता बनाए रखें।
- क्या न करें
व्रत के दौरान झूठ, चोरी और क्रोध से बचें।घर में गंदगी बिल्कुल न रहने दें, क्योंकि लक्ष्मी जी स्वच्छ स्थान में ही निवास करती हैं।नकारात्मक सोच और बुरे विचारों से दूरी रखें।
निष्कर्ष
महालक्ष्मी व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है; यह जीवन में नियंत्रण, संयम और भक्ति का भी प्रतीक है। जो व्यक्ति पूरे 16 दिन पूरी श्रद्धा से यह व्रत करता है और विधिपूर्वक उद्यापन करता है, उसके जीवन से दरिद्रता दूर हो जाती है और उसके घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है।
जीवन में धन, वैभव और सौभाग्य देवी महालक्ष्मी की कृपा से मिलता है। इसलिए हर गृहस्थ को महालक्ष्मी व्रत का पालन करना शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
✍️ लेखक: Sunny Mahto(मैं धार्मिक और सामाजिक विषयों पर जानकारीपूर्ण लेख लिखता हूँ ताकि पाठकों तक सही जानकारी पहुँच सके।)