
लेखक: (sunny mh)
तिथि: 27 जुलाई 2025
2025 की राजनीति दिन-ब-दिन दिलचस्प होती जा रही है। एक ओर नए गठबंधन बन रहे हैं, तो दूसरी ओर पुराने नेता फिर से सक्रिय हो रहे हैं। हाल ही में झारखंड की राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब सत्यनंद भोक्ता को राजद (राष्ट्रीय जनता दल) में संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई। 2019 में बीजेपी से बगावत करने वाले भोक्ता अब 2025 में ‘राजनीतिक तोहफा’ पाकर चर्चा में हैं।
और ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती – कुछ समय पहले ही उनकी बहू रुबी प्रकाश को महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अब ससुर को भी संगठन में महत्वपूर्ण पद दे दिया गया है। सियासी गलियारों में इसे लालू यादव की ‘लॉटरी राजनीति’ कहा जा रहा है।
एक पुराने योद्धा की वापसी फिर से लालू की एंट्री होगी लगता हैं
सत्यनंद भोक्ता झारखंड की राजनीति के अनुभवी नेता हैं। वे भाजपा के टिकट पर तीन बार विधायक और पाँच बार राज्य मंत्री रह चुके हैं। 2019 में जब उन्होंने बीजेपी छोड़कर बगावत की थी, तब कई राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके करियर को खत्म मान लिया था। लेकिन राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता।
2025 में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उन्हें दोबारा मंच दिया है – पार्टी संगठन में महत्त्वपूर्ण पद देकर। इसका मतलब साफ है: लालू यादव अनुभवी नेताओं को वापस लाकर पार्टी की जड़ें मजबूत करना चाहते हैं।
ध्यान से पढ़ें बहू रुबी प्रकाश की पदोन्नति: महिला मोर्चे की बागडोर
कुछ हफ्तों पहले भोक्ता की बहू रुबी प्रकाश को महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इस फैसले ने पहले ही सियासी हलचल पैदा कर दी थी। अब जब ससुर को भी अहम पद दे दिया गया, तो सोशल मीडिया पर ये कहा जाने लगा कि “राजद में बहू-ससुर दोनों की लॉटरी लग गई।”
परिवार के दो सदस्यों को संगठन में स्थान देना एक रणनीतिक निर्णय भी है – महिला वोटर्स और पिछड़े वर्ग को जोड़ने की कोशिश।
फिर लालू यादव लालू यादव की नई सियासी रणनीति
लालू यादव राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। वे जानते हैं कि 2025 का चुनाव जातीय समीकरण, पुराने नेताओं के अनुभव और जनाधार के बिना नहीं जीता जा सकता। सत्यनंद भोक्ता जैसे अनुभवी नेताओं को आगे लाकर वे पार्टी को जमीनी मजबूती देना चाहते हैं।
यह कदम सिर्फ एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि एक संदेश है – कि पार्टी उन्हीं को आगे बढ़ाती है जो समय पर साथ देते हैं और संघर्ष का रास्ता अपनाते हैं।
विपक्ष को लगता हैं अब खतरा मंडराने वाली हैं
हालांकि इस नियुक्ति पर विपक्षी दलों ने राजद को घेरा है। भाजपा और अन्य दलों ने इसे खुला परिवारवाद करार दिया है। सोशल मीडिया पर टिप्पणियाँ आईं कि “राजद अब राष्ट्रीय परिवार दल बनता जा रहा है।”
लेकिन राजद समर्थकों का कहना है कि ये नियुक्तियाँ केवल रिश्तों के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक कार्य, अनुभव और जमीनी पकड़ को देखकर की गई हैं। रुबी प्रकाश महिला मोर्चा में काफी सक्रिय रही हैं और भोक्ता जी का दशकों का अनुभव खुद गवाही देता है।
बीजेपी के लिए खतरे की घंटी? लगता हैं बीजेपी को नुकसान की सामना होगी
सत्यनंद भोक्ता जैसे पुराने और जनाधार वाले नेताओं का बीजेपी छोड़कर विरोधी दलों में जाना भाजपा के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। खासकर झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ जातीय गणित, क्षेत्रीय प्रभाव और स्थानीय पहचान बहुत मायने रखते हैं।

अगर इस तरह के और नेता राजद या महागठबंधन में शामिल होते रहे, तो भाजपा को आगामी चुनावों में दिक्कतें आ सकती हैं।
यह बहस अब ज़ोर पकड़ रही है कि राजद परिवारवाद को बढ़ावा दे रहा है या समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश कर रहा है। बहू-ससुर को एक साथ संगठन में स्थान देना एक उदाहरण है, लेकिन राजद के समर्थकों का कहना है कि पार्टी सिर्फ भरोसेमंद और मेहनती लोगों को आगे ला रही है।
रुबी प्रकाश एक शिक्षित महिला हैं जो कई वर्षों से महिला संगठनों में सक्रिय रही हैं, वहीं भोक्ता जी की पहचान एक वरिष्ठ और समर्पित नेता के रूप में रही है।
राजनीति में कोई कदम व्यर्थ नहीं होता
2019 में बीजेपी से अलग होना सत्यनंद भोक्ता के लिए एक जोखिम भरा फैसला था, लेकिन आज 2025 में वही कदम उन्हें फिर से राजनीति में सक्रियता और सम्मान दिला गया है। उनके साथ-साथ उनकी बहू को भी संगठन में पद देकर लालू यादव ने यह जता दिया है कि राजनीति में रिश्ते भी मायने रखते हैं – बशर्ते वो पार्टी के लिए उपयोगी हों।

2025 का चुनावी रण जितना विचारधारा का होगा, उतना ही संबंधों, रणनीतियों और पुराने भरोसे का भी होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि बहू-ससुर की यह सियासी ‘लॉटरी’ चुनावी नतीजों में कितना असर डालती है।