
बिहार की राजनीति हमेशा से दल-बदल और राजनीतिक समीकरणों से परिचित रही है। नेताओं के पार्टी बदलने का सिलसिला तेज होता जाता है जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य इस बार भी देखा गया है। बनमनखी (पूर्णिया) से भाजपा के पूर्व विधायक देवनारायण रजक ने अपने समर्थकों के साथ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गया है। उनके इस कदम ने पूरे सीमांचल क्षेत्र की राजनीति को भी उत्साहित कर दिया है, न केवल बनमनखी सीट पर।
भाजपा छोड़ने के कारण
2000 में, देवनारायण रजक बनमनखी से भाजपा के टिकट से विधायक बने। उस समय उन्होंने क्षेत्र में भाजपा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन पार्टी ने 2005 में उनका टिकट काट दिया। इसके बाद से वे पार्टी में निरंतर उपेक्षित रहे हैं।
चुनावों में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। भी संगठन में उचित सम्मान नहीं मिला। भाजपा ने उन्हें लंबे समय तक हाशिए पर रखा।
यही कारण था कि वर्षों की निराशा अब सामने आई और उन्होंने भाजपा छोड़कर राजद में शामिल हो गया।
राजद में प्रवेश और सम्मान
प्रदेश महासचिव रणविजय साहू और प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने पटना स्थित राजद के प्रदेश कार्यालय में एक कार्यक्रम में देवनारायण रजक और उनके समर्थकों को पार्टी की सदस्यता दी। उन्हें लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा, “गोपालगंज से रायसीना” भेंट कर सम्मानित किया गया और राजद का प्रतीक चिह्न वाला गमछा पहना दिया गया।
पार्टी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी देवनारायण रजक ने मुलाकात की। तेजस्वी यादव उन्हें आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण पद दे सकते हैं।
क्यों अहम है रजक का राजद में आना?
1. अनुभव और स्थिरता— राजद के लिए देवनारायण रजक का राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ लाभदायक हो सकते हैं।
2. सांस्कृतिक समीकरण: दलित समाज रजक को जन्म देता है। दलित वोट बैंक को राजद में मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
3. बनमनखी की भूमिका सीमांचल प्रदेश की बनमनखी सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। रजक आने से मुकाबला अधिक दिलचस्प हो जाएगा।
4. भाजपा को चोट लगी— रजक ने राजद में शामिल होकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है, क्योंकि सीमांचल क्षेत्र में भाजपा पहले से ही कमजोर समझी जाती है।
बनमनखी की राजनीतिक स्थिति
बनमनखी सीट हमेशा से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही है। यहां दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। भाजपा— यहां लंबे समय से संघर्ष करती रही है। राजद:
मुस्लिम-यादव समीकरण में दलितों का समर्थन मिलने पर राजद मजबूत हो सकता है। जेडीयू— जेडीयू इस सीट पर अपेक्षाकृत कमजोर है। राजद को यहां रजक के आने से सीधा लाभ मिल सकता है।
भाजपा के लिए संदेश
देवनारायण रजक का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए एक बड़ा संदेश है क्योंकि यह दिखाता है कि बिहार में टिकट वितरण और नेताओं की उपेक्षा को लेकर पार्टी में असंतोष गहराता जा रहा है, जिससे और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
राजद की रणनीति
इस समय राजद सीमांचल क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने में व्यस्त है। तेजस्वी यादव ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक नेताओं को अपनी ओर खींचा है। रजक के आगमन से राजद को दलित वोटों को कम करने में मदद मिलेगी। राजद को उनका अनुभव संगठनात्मक रूप से मजबूत करेगा। उन्हें चुनावी रणनीति के तहत टिकट या पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल सकता है।
आगामी चुनावी असर
बनमनखी में रजक के राजद में आने से मुकाबला अब त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय हो सकता है।
1. भाजपा: वह अपने पुराने वोट बैंक को सुरक्षित रखने का प्रयास करेगी।
2. राजद: रजक के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास करेगा।
3. JDU और अन्य दल समीकरण को बिगाड़ेंगे।
इस बदलाव से पूरे सीमांचल की राजनीति प्रभावित होगी, नहीं सिर्फ एक सीट पर।
जनता का नजरिया
आम जनता का मानना है कि चुनावों में नेताओं का दल बदलना कोई नई बात नहीं है। जिस पार्टी में भारी पलड़ा दिखाई देता है, उसके नेता शामिल होते हैं। रजक का यह कदम, हालांकि, इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वे भाजपा के पुराने और वरिष्ठ नेता रहे हैं।
निष्कर्ष
राजनीतिक दल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तेजी से बदल रहे हैं। राजद के लिए यह एक बड़ा लाभ है, जबकि भाजपा को पूर्व विधायक देवनारायण रजक के पार्टी छोड़ने से बड़ा झटका लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद उन्हें किस तरह व्यवस्थित करता है और भाजपा इस क्षति को कैसे भरपाता है।
बनमनखी विधानसभा की राजनीति अब अधिक दिलचस्प हो गई है। यहाँ दिए गए प्रत्येक वोट बिहार की राजनीति के बड़े समीकरण को बदल सकता है।
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स्वतंत्र पत्रकार, ब्लॉगर और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर Sunny Mahto हैं। वे लंबे समय से राजनीतिक खबरों, सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana), शिक्षा और करियर पर लेख लिखते रहे हैं। उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक और महत्वपूर्ण जानकारी देना है ताकि वे जागरूक होकर सही निर्णय ले सकें।
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