
फिर से बिहार में चुनाव की हो रही हैं बहुत बड़ी झमेल आईए जानते हैं बिहार की सबसे बड़ी न्यूज की आर्टिकल हम
LJP का इतिहास
लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) की स्थापना साल 2000 में रामविलास पासवान ने की थी। यह पार्टी बिहार की दलित राजनीति का एक अहम चेहरा रही है। रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में बड़ा सत्ता संघर्ष शुरू हुआ और पार्टी दो गुटों में बंट गई:
आइए ताजा घटना जानते हैं
ताजा घटना: 38 नेताओं का इस्तीफा
जुलाई 2025 में LJP (रामविलास) के 38 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से सामूहिक इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक हलके में हड़कंप मचा दिया। इन नेताओं में कई जिला अध्यक्ष, प्रदेश महासचिव, प्रवक्ता और पुराने कार्यकर्ता शामिल हैं।
इस्तीफे की वजहें क्या हैं?
इन नेताओं ने सार्वजनिक पत्र जारी कर जो प्रमुख कारण बताए हैं, वो निम्नलिखित हैं:
- चिराग पासवान की तानाशाही प्रवृत्ति
- कार्यकर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं
- संगठनात्मक गतिविधियों में पारदर्शिता की कमी
- टिकट वितरण में घरेलू और निजी पसंद को प्राथमिकता
- स्थानीय मुद्दों की अनदेखी
इस्तीफा देने वाले प्रमुख नेता
मनोज कुमार यादव – पूर्व प्रदेश प्रवक्ता
संदीप ठाकुर – युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष
नीरज पासवान – संगठन मंत्री
अजय कुमार सिंह – प्रदेश सचिव
इन सभी नेताओं ने प्रेस वार्ता करके साफ तौर पर कहा कि पार्टी अब “रामविलास पासवान के सिद्धांतों से भटक चुकी है”।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया
अब तक चिराग पासवान की तरफ से कोई औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार:
- वह इस मसले को “अंदरूनी साजिश” बता रहे हैं
- पार्टी में “क्लीनिंग प्रोसेस” की बात कर रहे हैं
- जल्द ही नई कार्यकारिणी के गठन की तैयारी में हैं
राजनीतिक विश्लेषण: क्यों है यह बड़ा झटका?
- राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो:
- ये इस्तीफे केवल संगठन का संकट नहीं हैं
- बल्कि चिराग पासवान की छवि पर सीधा हमला है
- इससे पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क कमजोर हो गया है
- 2026 के लोकसभा चुनावों पर इसका सीधा असर पड़ेगा
NDA पर असर
LJP (रामविलास) NDA की सहयोगी पार्टी है। ऐसे में:
भाजपा को अब चिराग पासवान की उपयोगिता पर फिर से विचार करना पड़ सकता है
गठबंधन के भीतर असंतोष की लहर दौड़ सकती है
लोकसभा सीटों के बंटवारे पर इसका असर होगा
जनता की नजर में चिराग
कभी युवा नेता के रूप में उभरे चिराग पासवान अब:
आलोचना के घेरे में हैं
पार्टी में भीतरघात और असंतोष उनके नेतृत्व की कमजोरी को दिखाता है
युवाओं में भी उनके प्रति आशा टूटने लगी है
2020 में जब उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा था, तो भले ही ज्यादा सीटें नहीं आईं, लेकिन vote share अच्छा था। अब वही base टूटता नजर आ रहा है।

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम बहुत महत्वपूर्ण मोड़ है। LJP (रामविलास) से एक साथ 38 नेताओं का इस्तीफा कोई सामान्य बात नहीं है।यह केवल चिराग पासवान की नहीं, बल्कि पूरे NDA के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल खड़ा करता है।अब देखना यह है कि चिराग पासवान इस राजनीतिक संकट को अवसर में बदल पाते हैं या नहीं।