
आप सब को मालूम हैं कि 2025 की लास्ट में ही बिहार सरकार की चुनाव होने वाली हैं फिर से नीतीश की कुर्सी पे खतरा मंडरा रहा हैं
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चिराग पासवान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पीएम मोदी के ‘हनुमान’ की वापसी से नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। क्या दोबारा होगा जेडीयू को बड़ा नुकसान? जानिए पूरी कहानी।
बिहार की राजनीति फिर से करवट ले रही है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान ने एक बार फिर सियासी पारा गर्म कर दिया है।
पिछली बार जिस तरह उन्होंने जेडीयू की जड़ों को हिला दिया था, वैसी ही हलचल अब फिर दिख रही है।
आप लोगों ने पिछले चुनाव में देखा होगा कि किस तरह से चिराग ने अपनी बिहार में हलचल मचा दिया था कही फिर से वही हालात पर खरा कर सकती हैं चिराग पासवान की नजरिया लग रही हैं
🧨 क्या चिराग पासवान फिर से खेला करने वाले हैं?
2020 के चुनाव में LJP ने एनडीए में रहते हुए जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे। चिराग ने तब कहा था — “मैं नरेंद्र मोदी का हनुमान हूं, लेकिन नीतीश कुमार की नीतियों से सहमत नहीं।”इस रणनीति ने जेडीयू को 28 सीटों तक सीमित कर दिया, जबकि बीजेपी को फायदा हुआ। नीतीश को मुख्यमंत्री तो बनना पड़ा, लेकिन बहुत कमजोर स्थिति में।
अब फिर से वही तर्ज दोहराई जा रही है। चिराग ने हाल में बिहार सरकार की खामियों पर सीधा हमला बोला है — बेरोजगारी, शिक्षा, बिजली, और भ्रष्टाचार पर खुलकर बात कर रहे हैं।
🎯 क्या है चिराग का मकसद? आखिर कर ये चिराग पासवान क्यों चर्चित में रहते जब भी चुनाव आती हैं तो
क्या चिराग खुद को बिहार में बीजेपी के लिए एक ‘ट्रंप कार्ड’ के रूप में पेश कर रहे हैं?या फिर यह नीतीश कुमार की छवि को फिर से नुकसान पहुंचाने की साज़िश है?राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चिराग की पार्टी अकेले चुनाव लड़े या किसी गठबंधन के साथ — उसका असर जेडीयू पर जरूर पड़ेगा।
🕵️♂️ BJP क्यों है चुप? आखिर कर बिहार में 15 साल से bjp की सरकार हैं
बीजेपी की खामोशी सबसे ज्यादा सवाल खड़े कर रही है।2020 में भी बीजेपी ने चिराग की रणनीति का विरोध नहीं किया था, जिससे समझा गया कि उन्हें ‘गुप्त समर्थन’ प्राप्त था।
अब फिर वैसी ही चुप्पी देखने को मिल रही है।क्या बीजेपी इस बार भी चिराग को सामने रखकर जेडीयू को किनारे करना चाहती है?
📌 जनता का मूड क्या कहता है? बिहार सरकार बनाने में झंडा की मूड किस तरह उमर रही हैं
बिहार की जनता ने चिराग को कभी भारी समर्थन नहीं दिया, लेकिन उनके उम्मीदवारों ने जेडीयू को हराने में निर्णायक भूमिका निभाई।अगर चिराग फिर से ‘मोदी प्रेम’ और ‘नीतीश विरोध’ की कहानी को दोहराते हैं, तो युवाओं और शहरी वोटरों का एक वर्ग उनकी ओर जा सकता है।
📢 नीतीश की टेंशन क्यों बढ़ रही है? ओर नीतीश कुमार की कुर्सी क्यों डगमगा रही हैं
नीतीश कुमार न केवल महागठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के लिए भी पहल की थी।अब अगर चिराग जैसे चेहरे मैदान में आकर नीतीश के खिलाफ माहौल बनाएंगे, तो ना केवल राज्य में, बल्कि केंद्र की राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।
बिहार की जनता की मूड देख कर लग रहा हैं कि चिराग की गूंज बिहार तब नहीं पूरा दिल्ली तब गूंजे गा
2025 का चुनाव केवल विकास और जाति समीकरण का नहीं होगा — यह छवि, गठबंधन, और चालाकी की लड़ाई होगी।चिराग पासवान, जो कभी रामविलास पासवान की विरासत संभालने के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब खुद एक ‘गेमचेंजर’ की भूमिका में हैं।

अबकी बार लग रहा है कि चिराग पासवान अपना सपना और बिहार में सरकार की नई उमंग में आएगी चिराग एक नौजवान नेता है जो बिहार बदलाव को दूर कर सकते हैं
पिछली बार कैसे हिला दी थी नीतीश की नींव?
2020 के विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने एनडीए में रहते हुए जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी खड़े किए थे। चिराग पासवान ने खुलकर नीतीश कुमार की नीतियों और नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। नतीजा यह रहा कि जेडीयू को सीटों के मामले में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा, और बीजेपी को अधिक सीटें मिलीं। यह रणनीति बीजेपी के लिए फायदेमंद रही, लेकिन नीतीश कुमार को कम सीटों के साथ मुख्यमंत्री पद पर टिकना पड़ा।
हाल ही में चिराग पासवान ने बिहार में शिक्षा, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है। LJP का कहना है कि बिहार में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नहीं हैं, शिक्षा प्रणाली चरमरा गई है और कानून व्यवस्था बुरी तरह बिगड़ चुकी है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मुद्दे भले ही जनहित में हों, लेकिन इनका इस्तेमाल रणनीतिक तरीके से हो रहा है ताकि नीतीश कुमार की छवि को नुकसान पहुंचे।
जेडीयू में बेचैनी, महागठबंधन में हलचल
चिराग की सक्रियता ने जेडीयू के भीतर हलचल मचा दी है। कई नेताओं का कहना है कि LJP और चिराग की रणनीति स्पष्ट रूप से नीतीश कुमार को कमजोर करने की है। उधर, महागठबंधन भी स्थिति पर नजर रखे हुए है। अगर चिराग और बीजेपी के बीच कोई अघोषित समझ है, तो यह गठबंधन की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
बिहार की जनता ने 2020 में चिराग पासवान को सीधे तौर पर बहुमत नहीं दिया था, लेकिन उनके उम्मीदवारों ने जेडीयू के उम्मीदवारों को हराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस बार जनता किसके साथ जाती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि चिराग वाकई जनता के मुद्दों को लेकर ईमानदार हैं या फिर यह सब एक राजनीतिक गेम है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब दूर नहीं हैं, और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बुनने में जुटे हैं। चिराग पासवान की एंट्री एक बार फिर नीतीश कुमार के लिए सिरदर्द बन सकती है। अगर बीजेपी चुप्पी साधे रखती है और चिराग को खुली छूट मिलती है, तो नीतीश कुमार की स्थिति कमजोर हो सकती है। वहीं, चिराग के लिए यह मौका है खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर स्थापित करने का।बिहार का अगला चुनाव न सिर्फ सीटों की लड़ाई होगी, बल्कि रणनीति, छवि और जनभावनाओं की भी परीक्षा होगी — और उसमें चिराग पासवान का ‘खेला’ निर्णायक भूमिका निभा सकता है।