
pakistan vs india
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का संबंध सिर्फ खेल तक नहीं सीमित है। जब भी दोनों टीमें मैदान पर उतरती हैं, करोड़ों लोगों का ध्यान मैच पर रहता है। लेकिन हाल ही में एक मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हैंडशेक करने से मना कर दिया, जो सिर्फ औपचारिकता थी। अब यह घटना बड़ी बहस का विषय बन गई है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रशीद लतीफ ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा—
👉 “अगर यह पहलगाम का मामला है, तो युद्ध करो। इसे क्रिकेट में मत लाओ।”
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
हाल ही में हुए एशिया कप मैच में दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने परंपरागत रूप से हाथ मिलाया। लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हैंडशेक नहीं किया और सीधे मैदान छोड़ दिया।
भारतीय कप्तान ने बताया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले और शहीद जवानों के सम्मान में यह कदम उठाया गया था। उनका मानना था कि इस समय पाकिस्तान के साथ सामान्य व्यवहार नहीं करना उचित था।
लेकिन पाकिस्तान ने इस तर्क को पसंद नहीं किया और इसे लगातार आलोचना दी गई।
Rashid Latif का गुस्सा क्यों फूटा?
पाकिस्तान टीम के पूर्व कप्तान रशीद लतीफ ने इस पूरी घटना पर गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने बताया— खेल में कुछ नियम हैं। युद्ध करो अगर राजनीतिक मुद्दों पर बात करनी है, लेकिन खेल की शुद्धता को खराब मत करो।
क्रिकेट को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश करना उचित नहीं है। ” लतीफ का यह बयान सोशल मीडिया पर बहुत पसंद किया जा रहा है। उन्हें लगता है कि भारत ने ऐसा करके क्रिकेट की भावना को ठेस पहुँचाई है।
खेल और राजनीति को अलग रखना क्यों ज़रूरी?
हमेशा से, खेल लोगों को एकजुट करने का एक साधन रहा है। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था, तब भी दोनों देशों ने क्रिकेट खेला।
क्योंकि क्रिकेट ने संबंधों को मजबूत बनाया है, इसे कई बार “क्रिकेट डिप्लोमेसी” कहा गया है। लेकिन जब खेल को राजनीतिक संदेश देने के लिए उपयोग किया जाता है, तो:
खेल भावना पर प्रश्न उठाते हैं। खिलाड़ी व्यक्तिगत स्तर पर बहस करते हैं। दर्शकों में शत्रुता और बढ़ सकती है।
भारत की दलील क्या है?
भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह पाकिस्तान के खिलाड़ियों के खिलाफ व्यक्तिगत व्यवहार नहीं था। वास्तव में, यह शहीदों और उनके आश्रितों का सम्मान करने के लिए था।
“जब देश शोक में है, तो हम ऐसे दिखावा नहीं कर सकते जैसे सब सामान्य है,” कप्तान ने कहा। हैंडशेक न करना चुपचाप हमारी प्रतिज्ञा थी। ”
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
भारतीय प्रेमी: टीम इंडिया के निर्णय का बहुमत ने समर्थन किया। उनका कहना था कि यह शहीदों के प्रति सम्मान और देशभक्ति का प्रतीक है। पाकिस्तानी प्रेमी:
उनका कहना था कि यह खेल भावना के खिलाफ था और भारतीय खिलाड़ियों पर राजनीति को खेल से जोड़ने का आरोप लगाया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशंसक:
कुछ ने कहा कि संवेदना व्यक्त करने के और भी तरीके हो सकते थे, लेकिन खेल की परंपराओं को तोड़ना सही नहीं था।
PCB और ICC की भूमिका
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने कहा कि यह स्पोर्ट्समैनशिप के खिलाफ है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) पर भी दबाव है कि वह इस पर
आधिकारिक बयान दे और भविष्य में ऐसे परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए।
खिलाड़ियों की जिम्मेदारी
खिलाड़ियों को सबसे अधिक दायित्व है कि वे: मैदान पर खेल भावना हमेशा बनाए रखें।
अपनी भावनाओं को व्यक्त करना ज़रूरी है, लेकिन नियमों को न तोड़ें। अगर आप भावना व्यक्त करना चाहते हैं,
तो उसके और भी तरीके अपनाएँ, जैसे मौन रखना या ब्लैक आर्मबैंड पहनना।
मीडिया और जनता का रोल
इन बहसों को अक्सर मीडिया बढ़ाता है। दर्शकों को यह भी समझना चाहिए कि: खिलाड़ी सरकारी नीतियों को नहीं प्रतिबिंबित करते हैं।
खेल का उद्देश्य जोड़ना है, नहीं तोड़ना। भावनाएँ आवश्यक हैं, लेकिन व्यवहार भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
रशीद लतीफ का बयान भारत को सीधे चुनौती देता है, लेकिन इसमें छिपा संदेश भी है कि खेल को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए। क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है; यह मानवता और सम्मान का प्रतीक भी है। अगर खेल में राजनीति शामिल होती है,
तो अगली पीढ़ियाँ ऐसी कहानियों से बच जाएँगी जहाँ खिलाड़ी प्रतिद्वंद्विता के बावजूद दोस्त बनते हैं।
यही कारण है कि राजनीतिक मुद्दों का समाधान राजनीतिक मंच पर किया जाए और खेल के क्षेत्र को सिर्फ खेल के लिए सुरक्षित रखा जाए।
✍️ लेखक का लेख (Sunny-Mahto आपके ब्लॉग के “मेरे बारे में” सेक्शन में शामिल कर सकता है): मैं एक स्वतंत्र लेखक और ब्लॉगर हूँ, जो खेल, शिक्षा और वर्तमान मुद्दों पर लेख लिखता हूँ। मैं पाठकों को तथ्यपूर्ण और संतुलित जानकारी देना चाहता हूँ, ताकि वे खुद अपनी राय बना सकें।