
पटना शहर में लंबे समय से मेट्रो रेल परियोजना का सपना देखा जा रहा था, क्योंकि शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक समस्याएं परेशान करती हैं। अब लगता है कि यह सपना धीरे-धीरे साकार होने लगा है। पटना मेट्रो परियोजना ने हाल ही में कम दृश्यता की स्थिति में एक विशेष अभ्यास चलाया। यह ट्रायल न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण था, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और भरोसे के बारे में एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता था।
ट्रायल कब और कहाँ हुआ?
सोमवार की शाम लगभग 7:30 बजे ISBT से मलाही पकड़ी कॉरिडोर पर इस विशेष ट्रायल का आयोजन किया गया। इस दौरान जानबूझकर कम रोशनी और धुंध जैसी परिस्थितियाँ बनाई गईं ताकि यह जांचा जा सके कि ट्रेन प्रतिकूल हालात में भी सुरक्षित रूप से चल सकती है या नहीं।
दिन में दो बार स्पीड को धीरे-धीरे बढ़ाकर ट्रेन को टेस्ट किया गया। उस समय बहुत कम लोग थे, इसलिए शाम का सेशन सबसे महत्वपूर्ण था।
ट्रायल में किन-किन चीजों की जाँच हुई?
इस ट्रायल का उद्देश्य सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं था; इसका उद्देश्य पूरे सिस्टम की शक्ति और सुरक्षा का आकलन करना था। टीम ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बारीकी से देखा—
1. ब्रेकिंग प्रणाली: आपात स्थिति में ट्रेन कितनी सुरक्षित और जल्दी रुक सकती है?
2. संकेत प्रणाली कम रोशनी में सिग्नल स्पष्ट दिख रहे हैं या नहीं और सेंसर ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।
3. हेडलाइट की क्षमता: अंधेरे और धुंध में पटरियों को दिखाने की क्षमता।
4. ट्रैक मापक ट्रैक पर मौजूद सेंसर ट्रेन की गति और स्थान की सटीक जानकारी देते हैं या नहीं।
5. आपातकालीन प्रकाश: किसी भी बिजली कट या आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा करना
6. सार्वजनिक पहचान प्रणाली— ड्राइवर और कंट्रोल रूम से यात्रियों को तत्काल सूचना देने का प्रबंधन।
7. नियंत्रण केंद्र की मार्गदर्शन ड्राइवर को कंट्रोल सेंटर से हर समय वास्तविक समय में दिशा-निर्देश मिल रहे थे।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (PMRCL) के अधिकारियों के अनुसार यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा। उनका कहना है कि – ट्रेन ने कम विजिबिलिटी में भी सुचारू रूप से संचालन किया। सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी आपातकालीन उपकरणों को सफलतापूर्वक जांचा गया। भविष्य में मौसम चाहे जैसा भी हो, यात्रियों को बिना बाधा मेट्रो सेवा मिल सकेगी।
क्यों है यह ट्रायल अहम?
पटना जैसे शहर में सर्दियों के मौसम में धुंध एक आम समस्या है, जिसमें सुबह-शाम विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है, इसलिए यह ट्रायल दिखाता है कि मेट्रो सेवा हर मौसम में सुरक्षित होगी, समय पर संचालन होगा, चाहे बाहर कितना भी कोहरा हो, और यात्रियों को एयरपोर्ट की तरह सुरक्षा और सुविधा मिलेगी।
पटना मेट्रो परियोजना का संक्षिप्त विवरण
- परियोजना की शुरुआत: 2019
- कुल कॉरिडोर: 2
- लाइन 1 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर): दानापुर से मेठापुर (लगभग 16.9 किमी)
- लाइन 2 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर): पटना रेलवे स्टेशन से न्यू ISBT (लगभग 14.05 किमी)
- कुल लंबाई: लगभग 32.9 किमी
- स्टेशन की संख्या: 24
- निगरानी एवं संचालन: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की तकनीकी मदद से
प्रायोरिटी कॉरिडोर – सबसे पहले पटना को मिलेगी यह सुविधा
फिलहाल, प्रायोरिटी कॉरिडोर में ट्रायल चल रहा है। यह नवीन ISBT से मलाही पकड़ी तक विकसित हुआ है। इसमें पांच स्टेशन हैं और इसकी लंबाई 6.1 से 6.5 किलोमीटर है।
- 1. मलाही पकड़ी
- 2. खेमेंचक
- 3. भूतनाथ रोड
- 4. जीरो माइल
- 5. न्यू ISBT
इस रूट पर काम लगभग पूरा हो चुका है और माना जा रहा है कि सितंबर 2025 के अंत या अक्टूबर 2025 तक आम जनता के लिए इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
पटना में हर दिन लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। मेट्रो की शुरुआत के बाद— यात्रा का समय बहुत कम होगा। ISBT से मलाही का सफर कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाएगा।
पर्यावरण के लिए लाभदायक होगा— डीजल और पेट्रोल की खपत कम होगी और प्रदूषण कम होगा। शहर के वाहनों पर दबाव कम होगा। यह युवा और नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे सुरक्षित साधन होगा।
भविष्य की योजना
अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में अधिक ट्रायल होंगे। प्रत्येक ट्रायल में अलग-अलग परिस्थितियों का परीक्षण किया जाएगा—
- धूप और तेज गर्मी में संचालन
- बारिश और पानी भराव की स्थिति
- भारी भीड़ के दौरान लोड टेस्ट
- आपातकालीन स्थिति में इवैक्यूएशन ड्रिल
इससे यह सुनिश्चित होगा कि जब मेट्रो औपचारिक रूप से शुरू हो, तो कोई भी तकनीकी कमी बाकी न रह जाए।
पटना के विकास में मेट्रो की भूमिका
पटना मेट्रो केवल परिवहन का एक साधन नहीं है; यह शहर की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बदल देगा। मेट्रो स्टेशन के आसपास का क्षेत्र तेजी से बढ़ेगा। नौकरी के नए अवसर आएंगे। पटना की पहचान बदल जाएगी और एक आधुनिक स्मार्ट सिटी बन जाएगी।
निष्कर्ष
पटना मेट्रो का लो विजिबिलिटी ट्रायल सफल रहा। यह दिखाता है कि परियोजना सही रास्ते पर है। यह सेवा आने वाले समय में आम जनता के लिए उपलब्ध होगी, जो यात्रा को आसान बनाएगी और पटना की पहचान को भी बढ़ा देगी।
यह मेट्रो ट्रायल सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है; यह बिहार के विकास में एक नया अध्याय भी है। अब शहरवासी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब वे पटना मेट्रो में पहली बार चल सकेंगे।
लेखक परिचय (About Me)
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