
भारत में नवरात्र का पर्व बहुत महत्वपूर्ण है। साल भर में चार नवरात्र आते हैं, लेकिन शारदीय नवरात्र सबसे लोकप्रिय और शुभ माना जाता है। यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की पहली तिथि से नवमी तक मनाया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्र 2025 सोमवार, 22 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा।
इस नवरात्र में मां दुर्गा गज या हाथी पर सवार होकर धरती पर आ रही हैं। धार्मिक लोग मानते हैं कि मां दुर्गा हाथी पर आती हैं, जो शुभ संकेत है। हाथी एक जल तत्व है, जो अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि और कृषि में वृद्धि का संकेत देता है।
🌺 मां दुर्गा के आगमन का महत्व
- शुभता का प्रतीक: हाथी पर सवार होकर आने वाली मां दुर्गा का आगमन शुभ माना जाता है।
- समृद्धि और सौभाग्य: इससे पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और परिवार में सौभाग्य का वास होता है।
- अच्छी वर्षा का संकेत: हाथी जल का प्रतिनिधि है, इसलिए इस बार अच्छी वर्षा और खेती में भरपूर उत्पादन होने की संभावना रहती है।
- धार्मिक महत्व: नवरात्र के समय मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करके जीवन में नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
🙏 शारदीय नवरात्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है; यह एक समय है जब आप अपने मन को शुद्ध करते हैं और साधना करते हैं।
भक्त इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा नौ दिनों तक करते हैं। नियमित भोजन और व्रत रखने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।
देवी भागवत, दुर्गा सप्तशती और चंडी पाठ करने से सफलता और शांति मिलती है। नवरात्र में मां दुर्गा को भोग, पुष्प, दीप और मंत्र देना बहुत महत्वपूर्ण है।
🌼 नौ देवियों की पूजा और उनके प्रिय फूल
नवरात्र में हर दिन मां दुर्गा का एक अलग रूप पूजा जाता है। हर देवी का एक खास प्रिय फूल होता है, जिसे अर्पित करने से वे भक्त की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
1. प्रथम दिवस – मां शैलपुत्री
- प्रिय फूल: गुड़हल, सफेद कनेर, चमेली
- लाभ: सुख-शांति और स्थिरता की प्राप्ति
2. द्वितीय दिवस – मां ब्रह्मचारिणी
- प्रिय फूल: कमल
- लाभ: ज्ञान, तप और विद्या की प्राप्ति
3. तृतीय दिवस – मां चंद्रघंटा
- प्रिय फूल: कमल, बेला, चमेली
- लाभ: साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास
4. चतुर्थ दिवस – मां कूष्मांड
- प्रिय फूल: गुड़हल, पीला कनेर
- लाभ: रोग-शोक का नाश और आरोग्य की प्राप्ति
5. पंचम दिवस – मां स्कंदमाता
- प्रिय फूल: कमल, गुलाब, गुड़हल
- लाभ: संतान सुख और संतान से जुड़ी कठिनाइयों का समाधान
6. षष्ठम दिवस – मां कात्यायनी
- प्रिय फूल: गेंदा, कमल, गुड़हल
- लाभ: विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति
7. सप्तम दिवस – मां कालरात्रि
- प्रिय फूल: रातरानी, गुड़हल
- लाभ: भय, दुख और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति
8. अष्टम दिवस – मां महागौरी
- प्रिय फूल: सफेद मोगरा, बेला, चमेली
- लाभ: पापों से मुक्ति और जीवन में पवित्रता
9. नवम दिवस – मां सिद्धिदात्री
- प्रिय फूल: कमल, चंपा
- लाभ: सभी सिद्धियों की प्राप्ति और हर कार्य में सफलता
🌹 फूल चढ़ाने के नियम
- 1. फूल हमेशा ताजे और साफ होने चाहिए।
- 2. बासी या मुरझाए फूल कभी न चढ़ाएं।
- 3. फूल तोड़ने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- 4. मां दुर्गा को फूल अर्पित करते समय पूरी श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए।
- 5. अगर विशेष फूल उपलब्ध न हों, तो गुड़हल का फूल जरूर चढ़ाएं।
🌱 नवरात्र और प्रकृति का संबंध
नवरात्र केवल पूजा का पर्व नहीं है; यह प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी है। यह समय है जब मौसम बदलता है, वर्षा ऋतु से शरद ऋतु आता है। पूजा में उपयोग किए जाने वाले फूल,
पत्ते और जड़ी-बूटियां स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती हैं। हल्का, सात्विक भोजन उपवास के दौरान शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाता है।

🔱 नवरात्र में किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान
- कलश की स्थापना, या घटस्थापना: इसी से नवरात्र की शुरुआत होती है।
- पूर्ण प्रकाश: मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए एक अखंड दीपक जलाओ। ध्वनि और पाठ: दुर्गा सप्तशती, अर्गला स्तोत्र और देवी कवच का पाठ।
- कन्या उत्सव: अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भोजन और उपहार देना।
- आह्वान: नवरात्र के अंतिम दिन भगवान की पूजा करना
🌏 नवरात्र का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
नवरात्र एकता, भक्ति और अनुशासन को सिखाता है।
विभिन्न राज्यों में इसे मनाया जाता है – गुजरात में गरबा बंगाल में एक दुर्गा पूजा पंडाल उत्तर भारत में रामलीला का आयोजन इस समय भक्ति, संगीत और सकारात्मक ऊर्जा से पूरा वातावरण भर जाता है।
📿 नवरात्र और आध्यात्मिक साधना
नवरात्र साधकों के लिए साधना, मंत्र-जप और योग करने का सबसे अच्छा समय है। मन की शुद्धि, भय का नाश और आत्मबल की वृद्धि मां दुर्गा की साधना से होती है। यह समय अपने आप पर ध्यान देने का है।
⚖️ सावधानियां और मान्यताएं
- 1. नवरात्र के दौरान मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- 2. व्रत के दौरान सात्विक भोजन लें— सिंघाड़े का आटा, कुट्टू, दूध और फल
- 3. मां दुर्गा को हमेशा शुद्ध मन और शुद्ध स्थान पर पूजें।
✨ निष्कर्ष
2025 का शारदीय नवरात्र केवल धार्मिक उत्सव नहीं है; यह प्रकृति, भक्ति, आस्था और संस्कृति के एकीकरण का पर्व भी है। यह शुभ संकेत है कि मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। भक्तों को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है यदि वे मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और प्रत्येक देवी को उनके प्रिय फूल देते हैं।
✍️ लेखक: (Sunny Mahto)👉 मैं सरकारी योजनाओं, शिक्षा और धार्मिक पर्वों पर रिसर्च-बेस्ड लेख लिखता हूं।