
लगता हैबिहार में फिर से चुनाव की तैयारी में हलचल हो रही है आपको बता दूं कि
बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जब चंडी विधानसभा के पूर्व विधायक अनिल सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अलविदा कहकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने ललनगंज से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर दिया है। उनके इस कदम से नालंदा ज़िले की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है।
कार्यकर्ताओं की भीड़ और गर्मजोशी से स्वागत
ललनगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान अनिल सिंह ने औपचारिक रूप से पार्टी में वापसी की घोषणा की। उन्होंने कहा:
मुझे लग रहा हैं कि बिहार में फिर से सरका की इधर उधर भटकने की कोशिश हो रही है
“अब मैं पूरी ताकत से कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ूंगा। जनता के लिए काम करना मेरा लक्ष्य है और मैं फिर से आपके बीच आने को तैयार हूं।”
सभा में कांग्रेस नेता कामेश्वर सिंह की अध्यक्षता में अनिल सिंह को सभी कार्यकर्ताओं ने ताली बजाकर समर्थन दिया। हाथ उठाकर सहमति जताई गई और पूरी रणनीति चुनाव को लेकर तैयार की जाने लगी।
अब हम जानेंगे आसान भाषा में अनिल सिंग की राजनीतिक दौर
अनिल सिंह का नाम चंडी विधानसभा क्षेत्र में जाना-पहचाना है। वे पहले भी इस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। उनका व्यवहार सरल और ज़मीनी रहा है, जिससे आम जनता उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई है। पहले कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कई वर्षों तक जनसेवा की, लेकिन बाद में वे बीजेपी में शामिल हुए थे।
अब एक बार फिर कांग्रेस में वापसी करके उन्होंने यह जता दिया कि विचारधारा और जनसेवा का रास्ता, राजनीतिक मजबूरियों से ऊपर होता है।
ललनगंज सीट बनी सियासी रणभूमि अब लग रहा हैं कि लालगंज में सरकार की बड़ा उमंग
अनिल सिंह के मैदान में उतरने से ललनगंज सीट पर चुनाव अब बेहद रोचक हो गया है। इस सीट पर पहले ही कई उम्मीदवारों की नजर थी, लेकिन अब जब एक पूर्व विधायक और अनुभवी नेता खुलकर सामने आ चुके हैं, तो मुकाबला त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय हो सकता है।
यह सीट इसलिए भी खास बन गई है क्योंकि:
कांग्रेस को मिला लोकप्रिय और अनुभवी चेहरा
बीजेपी को झटका और स्थानीय गुटबाज़ी की आशंका
नए उम्मीदवारों के लिए अब मैदान और चुनौतीपूर्ण हो गया है
जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाला चेहरा मैदान में
लालगंज के कार्यकर्ता को मिला कार्यकर्ताओं को मिला नया जोश
अनिल सिंह ने मंच से कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया।उन्होंने कहा:
कार्यकर्ताओं में उनके नेतृत्व को लेकर नया उत्साह देखने को मिला। अब हर गांव और पंचायत स्तर पर कांग्रेस को मज़बूती देने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
भाजपा की Lalganj से बारी उमंग से हो गई है हैं हाल खराब भाजपा के लिए बढ़ी मुश्किलें
बीजेपी को अनिल सिंह जैसे नेता के जाने से ज़बरदस्त झटका लगा है।
उनका जाना यह दर्शाता है कि पार्टी में अंदरूनी असंतोष है।स्थानीय नेताओं की आपसी खींचतान ने पुराने कार्यकर्ताओं को हाशिये पर धकेल दिया है।बीजेपी की पकड़ अब कमजोर होती दिख रही है, खासकर उन इलाकों में जहां नेता और जनता के बीच सीधे रिश्ते होते हैं।
अब देखते हैं लालगंज की जनता की राय जनता की प्रतिक्रिया
राजकुमार यादव, किसान, कहते हैं –“अनिल बाबू जब विधायक थे तो गांव में बिजली और सड़क का काम तेज हुआ था। हमें खुशी है कि वो फिर से लौटे हैं।”
श्रीमती पूनम देवी, महिला पंचायत सदस्य, कहती हैं –“वो नेता हैं जो हर शादी, अंतिम संस्कार और सुख-दुख में पहुंचते हैं। चाहे कांग्रेस हो या कोई पार्टी, हम उनके साथ हैं।”
क्या कांग्रेस कर पाएगी वापसी? मुझे लग रही हैं कि सरकार बदलाव हो जाएगी बिहार में इस बार
कई वर्षों से ललनगंज में कांग्रेस कमजोर स्थिति में रही है। लेकिन अब अनिल सिंह जैसे प्रभावशाली नेता के आने से पार्टी को नई जान मिली है। यदि कांग्रेस रणनीति के तहत आगे बढ़े और कार्यकर्ताओं को संगठित रखे, तो इस बार ललनगंज में कांग्रेस की वापसी पूरी तरह संभव है।
अनिल सिंह का बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में लौटना सिर्फ एक नेता का फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। इससे साफ है कि अब बिहार की राजनीति में नया मोड़ आने वाला है। ललनगंज की सीट एक हॉटस्पॉट बन चुकी है और जनता इस बार समझदारी से अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेगी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अनिल सिंह फिर से जनता का विश्वास जीत पाएंगे और क्या कांग्रेस उनके साथ सत्ता के द्वार तक पहुंच पाएगी?