
आज बिहार की राजनीति बहुत गर्म है। राजनीतिक दल ने विधानसभा चुनाव 2025 के नजदीक आते ही अपनी योजनाओं का खुलासा करने लगा है। लंबे समय से निष्क्रिय कांग्रेस अब दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से चर्चा में है—
1. कांग्रेस से नाराज़ होकर अलग हुए नेताओं की घर वापसी।
2. राहुल गांधी की 16 दिवसीय वोटर अधिकार यात्रा।
ये दो घटनाएं कांग्रेस को ऊर्जा देती हैं और महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की एकता और भविष्य की रणनीति को भी बदलती दिखती हैं।
रूठे नेताओं की घर वापसी
बिहार कांग्रेस को राहत मिली है कि कुछ बड़े नेताओं ने टिकट बंटवारे और आंतरिक मतभेदों से नाराज़ होकर घर वापसी की है। पार्टी में वरिष्ठ नेता मोहम्मद जहांगीर, आबिद और बुधरा मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद जावेद का पुनर्गठन हुआ।
2019 के उपचुनाव में जहांगीर ने टिकट बंटवारे से असंतोष व्यक्त किया और चुनाव से बाहर चले गए। “मैंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी थी, बस परिस्थितियां ऐसी बनीं कि दूरी बढ़ी,” उन्होंने साफ कहा। ” कांग्रेस को इन नेताओं का वापस आना महत्वपूर्ण दो कारणों से है:
1. संगठनात्मक बल: क्योंकि ये नेता स्थानीय स्तर पर अपने क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं।
2. सन्देश: इससे कार्यकर्ताओं को विश्वास होगा कि कांग्रेस चुनावों में फिर से मजबूत होगी।
राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा: 1300 किमी का सियासी सफर
बिहार के सासाराम से राहुल गांधी ने 16 दिनों की वोटर अधिकार यात्रा शुरू की। 20 जिलों से गुजरने वाली यह यात्रा 1300 किलोमीटर की है। 1 सितंबर को पटना में यह यात्रा एक बड़ी रैली के साथ समाप्त होगी।
यात्रा का लक्ष्य है कि Special Intensive Revision (SIR) के माध्यम से कथित तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ आवाज उठाना होगा।
यात्रा की खास बातें
कांग्रेस की पदयात्रा परंपरा का एक हिस्सा है, जैसे भारत जोड़ो यात्रा। इसमें विपक्ष की एकता दिखाने के लिए RJD, CPI(ML), CPI और VIP के नेता शामिल हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि “यह यात्रा लोकतंत्र को बचाने और मतदाता सूची में हो रहे गड़बड़ियों के खिलाफ है।” ”
महागठबंधन की ताक़त का प्रदर्शन
महागठबंधन की एकता का बल सासाराम में यात्रा की शुरुआत में दिखाई दिया। माना जाता है कि यह कांग्रेस की बिहार में पिछले 24 वर्षों में सबसे बड़ी रैली है। हजारों की भीड़,
अल्पसंख्यक वर्ग और युवा लोगों ने इसमें बहुत भाग लिया। यात्रा में कांग्रेस नेता जितेंद्र यादव की अगुवाई में पूर्णिया से भी सैकड़ों लोग शामिल हुए। इससे पता चला कि महागठबंधन बिहार में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
चुनाव आयोग और SIR विवाद
कांग्रेस और महागठबंधन ने लगातार आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बीजेपी के निर्देश पर काम कर रहा है। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, “कई जिंदा मतदाताओं को मृत घोषित कर मतदाता सूची से हटा दिया गया है।” ”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “BJP और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।” ” साथ ही, NDA ने इन आरोपों को लोकतंत्र को धोखा देने वाला बताया। अब चुनावी बहस का विषय बन गया है।
राजनीतिक समीकरण पर असर
1. कांग्रेस का बल: राहुल गांधी की यात्रा और नेताओं की घर वापसी ने कांग्रेसियों को उत्साहित कर दिया है।
2. महागठबंधन में समन्वय: यात्रा में सभी दलों की उपस्थिति ने विरोधी गठबंधन को नया साहस दिया है।
3. बीजेपी पर दबाव: आरोपों के बीच, बीजेपी बार-बार स्वतंत्र चुनाव आयोग का दावा करती है।
बिहार चुनाव 2025 के संभावित मुद्दे
पलायन और बेरोजगारी बिहार के हर चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा हैं। जातीय समीकरण दास, कुशवाहा, पासवान और अल्पसंख्यक वोट बैंक किस ओर झुकते हैं? विकास के मुकाबले भ्रष्टाचार—
महागठबंधन सामाजिक न्याय बनाए रखेगा, NDA बनाए रखेगा। वोटर लिस्ट पर बहस— कांग्रेस इसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनाकर लोगों को जागरूक कर रही है।
निष्कर्ष
वर्तमान में बिहार की राजनीति एक अत्यंत दिलचस्प परिवर्तन में है। नेताओं की वापसी और राहुल गांधी की यात्रा ने कांग्रेस को एक नया सहारा दिया है। महागठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे चुनाव में एकजुट होकर लड़ेंगे।
साथ ही, NDA ने अपने विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए इस यात्रा को “झूठ पर आधारित” बताया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार की जनता को किस बात का अधिक महत्व है— लोकतांत्रिक अधिकार, विकास या सामाजिक न्याय।
(About the Author)
Sunny Mahto (Founder – govyojna.de) बिहार और यूपी से जुड़े सरकारी योजनाओं, शिक्षा, और ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रमों पर लिखते हैं। इनका उद्देश्य आम जनता तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है ताकि लोग सरकारी योजनाओं और राजनीति से जुड़े अपडेट समय पर जान सकें।
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इनकी लेखन शैली इतनी सरल है कि हर वर्ग का पाठक राजनीतिक घटनाओं और योजनाओं को आसानी से समझ सकता है।