
बिहार में चुनाव को लेकर फिर से गरमाहट देखा जा रहा हैं आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि किस तरह से बिहार में। भाजपा की सरकार फिर से पूरी तागत लगा दी है आइए पूरी डिटेल में जानेंगे हम बिहार की राजनीति
बिहार में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर चरम पर है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने मिलकर एक रणनीतिक ‘70 प्लस फॉर्मूला’ तैयार किया है, जिसने मौजूदा विधायकों के बीच बेचैनी पैदा कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस नई रणनीति के तहत युवाओं को ज्यादा मौका देने की तैयारी है, जिससे कम से कम 9 वर्तमान विधायकों की टिकट कटने की पूरी संभावना बन रही है।
क्या है 70 प्लस का फॉर्मूला?
70 प्लस फॉर्मूला का सीधा अर्थ है—2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन (बीजेपी और जेडीयू) 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं को टिकट नहीं देगा और उनकी जगह नए, युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह फॉर्मूला भाजपा पहले भी कई राज्यों में आजमा चुकी है। अब इसे बिहार में लागू करने की तैयारी है।
नीतीश कुमार और बीजेपी नेतृत्व के बीच इस बात पर सहमति बन रही है कि गठबंधन की छवि को बेहतर बनाने के लिए “बदलाव” ज़रूरी है, और इसका पहला कदम होगा बूढ़े चेहरों की जगह युवा नेताओं को आगे लाना।
9 मौजूदा विधायकों की टिकट पर संकट
इस नीति का सबसे सीधा असर बिहार के कम से कम 9 मौजूदा विधायकों पर पड़ेगा जो या तो 70 वर्ष के पार हैं या फिर बीते कार्यकालों में निष्क्रिय या विवादों में रहे हैं। बीजेपी और जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं का ग्राउंड कनेक्शन कमजोर हो चुका है या जिनके खिलाफ जनता की नाराजगी है, उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा, जो विधायक पिछले चुनावों में बहुत कम अंतर से जीते थे और अब क्षेत्र में कमजोर हो चुके हैं, उनकी भी सीट बदलने या टिकट काटने की संभावना है।
बिहार की युवाओं की क्या है चेहरों को प्राथमिकता
बीजेपी और जेडीयू दोनों ही इस बार युवाओं, महिलाओं और पढ़े-लिखे सामाजिक कार्यकर्ताओं को टिकट देने की योजना पर काम कर रहे हैं। पार्टी को लगता है कि इससे एक नई लहर बनेगी और विपक्ष के ‘पुराने चेहरे बनाम नया बिहार’ के नारे को जवाब दिया जा सकेगा।
संगठनात्मक स्तर पर भी युवा नेताओं को ज़िलों की जिम्मेदारी दी जा रही है। राज्यस्तर पर युवा मोर्चा को एक्टिव किया गया है और नई भर्ती प्रक्रियाएं चल रही हैं। यह दर्शाता है कि यह बदलाव केवल चुनावी दिखावा नहीं, बल्कि संगठन को नयी दिशा देने का प्रयास है।
क्या नीतीश कुमार बिहार में चुपके से रच रही हैं रणनीति
नीतीश कुमार की चुप्पी और रणनीति
सीएम नीतीश कुमार इस पूरे मुद्दे पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दे रहे हैं, लेकिन अंदरखाने बड़ी बैठकें चल रही हैं। वे भी जानते हैं कि लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण कई चेहरों से जनता ऊब चुकी है। ऐसे में बदलाव की जरूरत है।
नीतीश का ध्यान इस बार अपने उत्तराधिकारी को तैयार करने और अगली पीढ़ी को नेतृत्व में लाने की ओर है। अगर वे इस बदलाव में सफल रहते हैं, तो यह उनका सबसे बड़ा राजनीतिक योगदान माना जा सकता है।
आखिर क्या है भाजपा की 2025 में रणनीति आइए जानेंगे
बीजेपी का लक्ष्य 2025 में पूर्ण बहुमत
बीजेपी का सपना है कि 2025 में वह बिहार में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाए। इसके लिए पार्टी केवल जातीय समीकरण पर भरोसा नहीं करना चाहती, बल्कि प्रदर्शन आधारित टिकट वितरण की योजना पर काम कर रही है। इसीलिए 70 प्लस फॉर्मूला लाया गया है।
बीजेपी का मानना है कि अगर युवा और ऊर्जावान उम्मीदवारों को सामने लाया जाए, तो वे ना सिर्फ जीतेंगे, बल्कि जनता से भी बेहतर जुड़ाव बना पाएंगे।

बिहार में क्या है विपक्ष की तैयारी
विपक्ष की प्रतिक्रिया: भाजपा-जेडीयू के ‘70 प्लस फॉर्मूले’ पर
भाजपा-जेडीयू द्वारा लाए गए 70 प्लस फॉर्मूले पर बिहार के विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खासकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस नीति को एक “डर और असुरक्षा” की राजनीति करार दिया है। विपक्ष का दावा है कि यह फॉर्मूला दरअसल जनता के गुस्से से बचने की एक साजिश है, न कि कोई सकारात्मक बदलाव।