
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मतदान का अधिकार सर्वोच्च संवैधानिक अधिकार माना जाता है। लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथ में है, और जनता इसे मतदान के माध्यम से व्यक्त करती है। यही कारण है कि चुनाव आयोग बार-बार मतदाता सूची को देखता है ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।
विधानसभा चुनाव 2025 में होने के कारण बिहार में चुनावी हलचल लगातार बढ़ रही है। ऐसे में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया है। अब तक, इस प्रक्रिया के तहत 1 लाख 98 हजार 660 लोगों ने नए मतदाता बनने का अनुरोध किया है।
आइए पूरी जानकारी प्राप्त करें कि चुनाव आयोग ने क्या बताया है और बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण की वर्तमान स्थिति क्या है।
प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन
चुनाव आयोग ने बताया कि 1 अगस्त 2025 को प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई है। 2 अगस्त से दावा एवं आपत्तियां (Claim & Objection) दर्ज करने का कार्य शुरू हुआ।
अगर योग्य नागरिक का नाम इस प्रक्रिया में सूचीबद्ध नहीं है, तो वह फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकता है। साथ ही, आपत्ति दर्ज की जा सकती है अगर किसी का नाम गलत तरीके से दर्ज है,
किसी मृत व्यक्ति का नाम अभी भी सूची में है या पते में त्रुटि है।
अब तक कितने आवेदन आए?
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार: 1,98,660 नए नागरिकों ने मतदान करने का अनुरोध किया है। ये नागरिक 18 साल से अधिक उम्र के होने चाहिए। ताकि उनका नाम आगामी मतदाता सूची में शामिल हो सके,
नागरिकों ने फॉर्म-6 भरकर आवेदन किया है। इसके अतिरिक्त, 60,010 आपत्तियां और दावे सीधे मतदाताओं से आए हैं। इनमें से चुनाव आयोग ने 2,394 मामले भी निपटारे हैं। शेष मामलों को सामान्यतः 7 दिनों के अंदर हल किया जाएगा।
राजनीतिक दलों की निष्क्रियता
मुख्य तथ्य यह है कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने दावा या आपत्ति नहीं दर्ज की है।
राजनीतिक दल आम तौर पर अपने समर्थकों के नाम सूची में डालने और विरोधी वोटों की गलतियों को बताने में सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

मतदाता सूची पुनरीक्षण क्यों ज़रूरी है?
बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में मतदाता सूची सही और अद्यतन है।
1. युवा मतदाताओं का जुड़ना: लाखों युवा हर साल 18 वर्ष की आयु पूरी करते हैं। वे मतदान करने के अधिकार से वंचित रह जाएंगे अगर उन्हें समय पर मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया।
2. गलतियों की जांच: जब नाम गलत छप जाते हैं, पते अधूरे होते हैं या एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होता है, तो आपको यह देखना चाहिए। इन त्रुटियों को सुधारने के लिए पुनरीक्षण की आवश्यकता होती है।
3. मर चुके लोगों के नामों को हटाना: मृत लोगों के नाम अक्सर सूची में रहते हैं। ताकि पारदर्शिता बनी रहे, इसे समय-समय पर हटाना चाहिए।
बिहार में मतदाता सूची की अहमियत
हमेशा से बिहार एक राजनीतिक सक्रिय राज्य रहा है। यहाँ के चुनावों का राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर होता है। बिहार में लगभग 7.5 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश मतदान करने के योग्य हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में 7.3 करोड़ लोगों में से लगभग 57% ने मतदान किया। 2025 के चुनावों में नए मतदाताओं का जुड़ना राजनीतिक दलों की चाल को पूरी तरह बदल सकता है।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया
मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाने के लिए चुनाव आयोग कई चरणों में काम करता है:
1. प्रारूप सूची का प्रकाशन: इसका उद्देश्य नागरिकों को यह सुनिश्चित करना है कि उनके नाम सही हैं या नहीं।
2. दावा एवं आपत्ति: नागरिकों को गलत नामों को सुधारने या नए नामों को जोड़ने के लिए आवेदन करने का अधिकार है।
3. क्षेत्र की जांच बूथ लेवल अधिकारी प्रत्येक घर में जाकर सूचना की पुष्टि करते हैं।
4. अंतिम मतदाता सूची जारी करना— अंतिम सूची सभी दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद जारी की जाती है।
मतदाता बनने के फायदे
हर नागरिक को मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करना अनिवार्य है क्योंकि— इससे लोकतंत्र में भागीदारी की भावना पैदा होती है। आप चाहें तो अपने उम्मीदवार को चुन सकते हैं।
वोटर आईडी कार्ड, पैन, पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में एक वैध पहचान पत्र है। सरकारी योजनाओं या लाभों का लाभ उठाने के लिए मतदाताओं से अक्सर पहचान पत्र मांगा जाता है।
बिहार के युवाओं की बड़ी भूमिका
2025 विधानसभा चुनाव में बिहार के युवा मतदाता बहुत महत्वपूर्ण होंगे। इस बार लगभग दस से बारह लाख युवा मतदाता शामिल हो सकते हैं।
आने वाले चुनावों में सरकार की किस्मत किस दल या गठबंधन की ओर युवाओं का झुकाव रहेगा, इससे तय होगा।
निष्कर्ष
बिहार में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है, और अब तक 1 लाख 98 हजार 660 लोगों ने मतदान करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, छह सौ से अधिक शिकायतें और आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
ताकि अंतिम मतदाता सूची पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाई जा सके, चुनाव आयोग लगातार इन दावों और आपत्तियों का निपटारा कर रहा है।
यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाए और मतदान के दिन अपना वोट दें।
(About Me):
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