
हम सभी मालूम हैं कि जब तेज प्रताप यादव ने अपने सदी की बात सोशल मीडिया पर शेयर किया तब उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने उनको अपने पार्टी से निकाल दिया था
लेकिन अभी तेज प्रताप को क्या कहना है जानिए
पटना, 28 जुलाई 2025:
राजद के पूर्व नेता तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर से बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने खुलासा किया है कि उन्हें पार्टी में बंधक की तरह रखा गया और उन्हें जबरन बाहर कर दिया गया, क्योंकि पार्टी को लगा कि “एक और लालू यादव” आ गया है।
तेज प्रताप यादव ने अपने बयानों से यह जता दिया कि वे खुद को पार्टी से निकाले जाने को लेकर अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने सीधे तौर पर अपने विरोधियों को घेरते हुए कहा, “मुझे मेरी ही पार्टी में कैद कर लिया गया था। मेरी आवाज को दबाया गया, क्योंकि उन्हें डर था कि मैं अपने पिता लालू प्रसाद यादव की तरह पार्टी में मजबूत नेतृत्व बन सकता हूं।”
हम जानेंगे पूरा मामला डिटेल में (क्या है पूरा मामला?)
कुछ समय पहले तेज प्रताप यादव को आरजेडी (RJD) से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। यह फैसला तब आया जब उनके बयानों और गतिविधियों से पार्टी के अंदर टकराव की स्थिति बनने लगी। तेज प्रताप का दावा है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निकाला गया, क्योंकि उन्हें “दूसरा लालू यादव” मान लिया गया और पार्टी को यह डर सताने लगा कि कहीं वे नेतृत्व की कमान न संभाल लें।
पार्टी और परिवार से दूरी
तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि उन्हें सिर्फ पार्टी से ही नहीं, बल्कि अपने ही परिवार से भी दूर कर दिया गया। उनका यह बयान साफ तौर पर पार्टी के अंदर जारी मतभेद और पारिवारिक राजनीति की तरफ इशारा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया ताकि उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
आखिर में तेज प्रताप क्या बोले 💬 तेज प्रताप यादव बोले…
तेज प्रताव को कहना है कि मुझे कमरे में बंद किया मेरी बेटी को दबाया गया बोलने तक नहीं दिया क्योंकि उन्हें डर था कि ओ लालू प्रसाद पार्टी में आ गया है बहुत बाते हुआ आगे जानते हैं
क्या तेज प्रताप फिर से करेंगे वापसी?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या तेज प्रताप यादव फिर से अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे? या वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करेंगे?
हालांकि अभी तक तेज प्रताप ने अपने भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके बयानों से इतना जरूर साफ हो गया है कि वे चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।
राजनीति में पारिवारिक मतभेद का नया अध्याय
तेज प्रताप यादव का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत दर्द नहीं है, बल्कि यह उस राजनीति का हिस्सा है जहां अपनों को ही अपनों से दूर कर दिया जाता है। आने वाले समय में तेज प्रताप यादव क्या रुख अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
तेज प्रताप का यह खुलासा एक बार फिर बिहार की राजनीति में पारिवारिक मतभेदों को उजागर कर रहा है। एक तरफ तेजस्वी यादव राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मजबूत करते दिखते हैं, वहीं दूसरी तरफ तेज प्रताप खुद को उपेक्षित और अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
