
भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संसद है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं। हर साल संसद के तीन प्रमुख सत्र होते हैं – बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र। 18वीं लोकसभा का 5वां सत्र, जिसे मानसून सत्र कहा जा रहा है, राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। इस सत्र में कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे और सरकार अपने कार्यों की रिपोर्ट जनता के प्रतिनिधियों के सामने रखेगी। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस मानसून सत्र की विशेषताएँ क्या हैं, इससे क्या उम्मीदें हैं और इसका जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
1. 18वीं लोकसभा और उसका 5वां सत्र
18वीं लोकसभा का गठन वर्ष 2024 के आम चुनावों के बाद हुआ था। अब यह लोकसभा अपने पांचवें सत्र में प्रवेश कर चुकी है। संसद का यह मानसून सत्र सामान्यत: जुलाई से अगस्त के बीच आयोजित किया जाता है। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्त्वपूर्ण बहसें होती हैं। यह सत्र आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं का रोडमैप जनता तक पहुँचाने का प्रयास करती है।
2. मानसून सत्र का महत्व
मानसून सत्र देश के आर्थिक वर्ष का मध्य सत्र होता है। इसमें बजट सत्र में पेश की गई घोषणाओं की समीक्षा की जाती है और आवश्यक संशोधन या पूरक बजट भी लाए जाते हैं। इस बार 5वें सत्र में कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई विधेयक लाए जाने की संभावना है। इसके अलावा, विपक्ष भी इस सत्र में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा, जिनमें महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
3.मानसून सत्र के एजेंडे में कई विधेयक शामिल हो सकते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हो सकते हैं:
- कृषि सुधार और किसानों की आय से संबंधित विधेयक।
- श्रम सुधार और नई नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए नीतियाँ।
- शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए डिजिटल एजुकेशन और NEP (नई शिक्षा नीति) से जुड़ी योजनाएं।
- महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा।
- डिजिटल इंडिया और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए कानून।
4. विपक्ष की भूमिका
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है। 5वें मानसून सत्र में विपक्ष महंगाई, बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रोजगार की कमी और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा। इसके अलावा, विपक्ष यह भी चाहेगा कि संसद में अधिक समय चर्चा के लिए मिले ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर गहन बहस हो सके।
5. सरकार की प्राथमिकताएँ
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस सत्र में विकास योजनाओं को गति देना और जनता के बीच सकारात्मक संदेश भेजना है। प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट विभिन्न मंत्रालयों की उपलब्धियों को उजागर करेंगे। खासकर, ग्रामीण विकास, नई टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य योजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
6. जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस
मानसून सत्र का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि जनता की समस्याओं पर संसद में खुलकर बहस हो। इस बार निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा की संभावना है:
कृषि संकट और MSP की गारंटी।
बेरोजगारी और कौशल विकास कार्यक्रम।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और AIIMS जैसे संस्थानों की संख्या बढ़ाने की योजना।महंगाई पर नियंत्रण और गरीबों के लिए सब्सिडी।
7. 18वीं लोकसभा के अब तक के कार्य
18वीं लोकसभा के पिछले चार सत्रों में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। डिजिटल इंडिया, नई शिक्षा नीति, महिला आरक्षण बिल और ग्रीन एनर्जी जैसी योजनाएं प्रमुख रही हैं। 5वें सत्र में सरकार इन योजनाओं को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाएगी।—
8. उम्मीदें और चुनौतियाँ
जनता को इस मानसून सत्र से काफी उम्मीदें हैं। लोग चाहते हैं कि सरकार उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाए। वहीं, चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं – वैश्विक आर्थिक मंदी, अंतरराष्ट्रीय तनाव, जलवायु परिवर्तन और देश के अंदर सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ संसद में चर्चा के केंद्र में रहेंगी।
निष्कर्ष( मुख्य बाते जो कि गई हो )
18वीं लोकसभा का 5वां सत्र यानी मानसून सत्र 2025 भारत की राजनीति और विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह सत्र न केवल विधायी कार्यों को गति देगा बल्कि सरकार और विपक्ष दोनों को जनता की समस्याओं पर खुलकर चर्चा का अवसर देगा। यदि यह सत्र सुचारू रूप से चलता है, तो इससे देश में लोकतंत्र और मजबूत होगा।