
योजना: भारत के राजनीतिक गलियारों में आजकल एक ही प्रश्न उठता है: “देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा?” उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद से राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। जबकि उनके अचानक त्यागपत्र देने के पीछे स्वास्थ्य कारण बताए जा रहे हैं, इसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद डॉ. शशि थरूर ने कहा, “इस बार विपक्ष की हार तय है! आइए पूरी कहानी, मौजूदा घटनाक्रम, संभावित उम्मीदवार और इस चुनाव का राजनीतिक महत्व जानें।
1. जगदीप धनखड़ का इस्तीफा – कारण और समयबद्धता
अगस्त 2022 में, जगदीप धनखड़ ने देश के चौबीसवें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वह राजस्थान से हैं और भाजपा से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 21 जुलाई 2025 को, उन्होंने अपनी निजी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्य मुद्दा:
धनखड़ की सार्वजनिक उपस्थिति पिछले कुछ महीनों से कम हो गई है। वे कुछ मेडिकल चेकअप के लिए भी विदेश गए थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए उनके “सेवा और योगदान” की प्रशंसा की
2. उपराष्ट्रपति का पद और चुनाव प्रक्रिया
भारत में राज्यसभा का सभापति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आवश्यक प्रक्रिया:
लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य निर्वाचक मंडल में हैं। गुप्त मतदान होता है और प्रो-परपोर्शनल सिस्टम वरीयता मतदान करता है। भारत के चुनाव आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करता है।
3. शशि थरूर का बयान – विपक्ष की स्थिति पर करारा प्रहार
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मीडिया से बात करते हुए एक स्पष्ट बयान दिया, जैसे ही उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की चर्चा शुरू हुई: 2022 की तुलना में 2025 की स्थिति कमजोर है। विपक्ष विभाजित हो गया है और एकजुटता सिर्फ नाममात्र की है। भाजपा की उपराष्ट्रपति चुनाव जीत लगभग निश्चित है। ”
थरूर का बयान निम्नलिखित है: विरोधी गठबंधन की अंदरूनी खींचतान पर संकेत। क्षेत्रीय पार्टियों के बीच सहयोग की कमी एनडीए और भाजपा के पास मजबूत संख्या बल है।
4. कौन बन सकता है अगला उपराष्ट्रपति? संभावित उम्मीदवारों की सूची
अब जब पद खाली है, सभी की निगाहें उम्मीदवारों पर हैं। NDA से प्रस्तावित नाम:
1. डॉ. Esme मूर्ति: एक सामाजिक कार्यकर्ता और इंफोसिस फाउंडेशन की पूर्व अध्यक्ष
2. हरदीप सिंह पुरी: पूर्व राजनयिक और केंद्रीय मंत्री
3. ओम माथुर: वरिष्ठ भाजपा नेता, संगठनात्मक अनुभव
4. अरुण गोविल: रामायण का नाम और भाजपा का नया चेहरा, दक्षिण भारत में पार्टी का प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
विरोधी पक्ष का संभावित नाम:
1. गुलाम नबी आज़ाद—अब कांग्रेस में नहीं हैं, लेकिन वरिष्ठ नेता हैं।
2. कपिल सिब्बल—संविधान और कानून की गहरी समझ, लेकिन उनका समर्थन कमजोर है।
3. युवा शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी
4. सरदार पवार: एक अनुभवी विकल्प अगर विरोधी उन्हें मनाने में सफल होता है।

5. भाजपा की रणनीति – ‘सहज जीत’ के लिए प्लान तैयार
भाजपा ने पहले ही संसद में अपनी संख्या को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। 2024 के आम चुनावों के बाद एनडीए ने 350 से अधिक सांसदों को चुना है। भाजपा को भी छोटे और निर्दलीय दलों का समर्थन मिलता है।
रणनीतिक लक्ष्य: एक चेहरा लाना जो हर वर्ग को व्यक्त करे। महिला या अल्पसंख्यक उम्मीदवार पर ध्यान देना विपक्ष को विभाजित करने का प्रयास।
6. विपक्ष की चुनौती – एकता की असली परीक्षा
अब भी, “इंडिया” गठबंधन के कई घटक दल प्रधानमंत्री पद के लिए आपस में संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में दिल्ली-पंजाब मॉडल पर मतभेद हैं, TMC और कांग्रेस में बंगाल पर तनाव है, और सपा-बसपा के पुराने विवाद अभी भी जारी हैं। ऐसे में साझा उम्मीदवार चुनना कठिन है।
7. जनता की राय – सोशल मीडिया पर ट्रेंड
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर #NextVicePresident ट्रेंड रहा है। यूज़र्स का विचार: सुधा मूर्ति को बहुत से लोग समर्थन दे रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उपराष्ट्रपति एक “गंभीर और तटस्थ व्यक्ति” होना चाहिए। यद्यपि वह उम्मीदवार नहीं हैं, शशि थरूर को भी युवा वर्ग का समर्थन मिल रहा है।
8. उपराष्ट्रपति पद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति थे। तब से अब तक, कई विद्वानों, नेताओं और राजनयिकों ने इस पद पर काम किया है।
कुछ प्रसिद्ध नाम: साहब सिंह शेखावत हम्मद अंसारी वेंकायला नायडू जयप्रकाश धनखड़
9. चुनाव की संभावित तिथि और प्रक्रिया

अगले कुछ दिनों में उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना चुनाव आयोग द्वारा जारी की जाएगी। संभावित समय सीमा:
सूचना: अगस्त का पहला सप्ताह नाम:
अगस्त के द्वितीय सप्ताह तक योगदान: अगस्त महीने के अंत तक शाप: सितंबर की शुरुआत में
कौन होगा अगला उपराष्ट्रपति?
भविष्य बताएगा कि देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, लेकिन भाजपा अपनी रणनीति से विपक्ष को हराने लगी है और शशि थरूर ने स्पष्ट रूप से विपक्ष की हार की भविष्यवाणी की है, इससे स्थिति स्पष्ट होती जा रही है। अगर विपक्ष एकजुट नहीं होता, तो उपराष्ट्रपति पद भी NDA को मिलेगा।
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